वहीं है दिल, कराइन तमाम कहते हैं
वो एक ख़लिश के जिसे तेरा नाम कहते हैं
तुम आ रही हो के बजती हैं मेरी जंजीरें
न जाने क्या मेरे दीवार-ओ-बाम कहते हैं
यही किनार-ए-फ़लक का सियाह्तरीन गोशा
यही है मतला-ए-माह-ए-तमाम , कहते हैं
पियो के मुफ्त लगा दी गई है खून-ए-दिल की कसीर
गिरां है के अब के मय लाल फ़ाम कहते हैं
फ़कीह शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें
के चांदनी को भी हज़रत हराम कहते हैं
नवा-ए-मुर्ग़ को कहते हैं अब ज़ियाँ-ए-चमन
खिले न फूल उसे इंतिज़ाम कहते हैं
कहो तो हम भी चलें फ़ैज़ अब नहीं सर-ए-दार
फर्क-ए-मर्तबा ख़ास-ओ-आम कहते हैं
This is for all those who love urdu,would like to Read and write Urdu.
Thursday, September 3, 2009
मतल'अ या मतला या मितला
मतल'अ कहते हैं ग़ज़ल के पहले शेर को, इसके दोनों भाग एक जैसे होते हैं। इसे कभी क्षितिज या उद्गम ( शुरू होने की जगह) के बतौर भी लिखा जाता है।
م+ط+ل+ع=مطلع
मतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है।
फ़ैज़ कहते हैं -
" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,
यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "
م+ط+ل+ع=مطلع
मतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है।
फ़ैज़ कहते हैं -
" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,
यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "
तरीन या तरीं
तरीं का अर्थ है सबसे ज़्यादा , यह एक डिग्री है जो शब्द के अंत में जोड़ दी जाती है , जैसे बद तरीं याने सबसे बुरा या सियाह्तरीनयाने सबसे अशुभ।
ت+ر+ي+ں=تريں
ت+ر+ي+ں=تريں
किनार या कनार
किनार या कनार का अर्थ है किनारा,तट , इसे बगल या गोद के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
ک+ن+ا+ر=کنار
ک+ن+ا+ر=کنار
क़रीन
क़रीन का अर्थ है रिवाज़, तरीका, शिष्ठाचार ।
ق+ر+ي+ن+ہ=قرينہ
गुलज़ार साहब ने विशाल भरद्वाज की फ़िल्म कमीने में लिखा है :
" जीने के सब क़रीने,थे हमेशा से कमीने "
ق+ر+ي+ن+ہ=قرينہ
गुलज़ार साहब ने विशाल भरद्वाज की फ़िल्म कमीने में लिखा है :
" जीने के सब क़रीने,थे हमेशा से कमीने "
Wednesday, September 2, 2009
आँख मिलते ही बाहम छा गई - दाग़
बारहा
बारहा याने बार बार, निरंतर ।
ग़ालिब ने कहा है :
"बारहा देखीं हैं उनकी रंजिशें,
पर कुछ अब के सरगिरानी और है। "
ب+ا+ر+ھ+ا=بارھا
ग़ालिब ने कहा है :
"बारहा देखीं हैं उनकी रंजिशें,
पर कुछ अब के सरगिरानी और है। "
ب+ا+ر+ھ+ا=بارھا
Wednesday, August 26, 2009
बुत
बुत का मतलब है मूर्ती,प्रतिमा, प्रेमिका , वो जो चुप बैठा हो, चुप रहने वाला।
बुतकदा या बुतखाना का अर्थ है मन्दिर या मूर्ति गृह या प्रेयसी का घर ।
बुत परस्त याने मूर्तिपूजक,प्रेमी। इस शब्द को कभी कभी हिन्दुओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
बुत= ب+و+ت=بوت
बुतखाना=بوتخان
बुतकदा=بوتکدا
बुतपरस्त= بوتپرست
बुतकदा या बुतखाना का अर्थ है मन्दिर या मूर्ति गृह या प्रेयसी का घर ।
बुत परस्त याने मूर्तिपूजक,प्रेमी। इस शब्द को कभी कभी हिन्दुओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
बुत= ب+و+ت=بوت
बुतखाना=بوتخان
बुतकदा=بوتکدا
बुतपरस्त= بوتپرست
सुना करो मेरी जान इन से उन से - कैफ़ी आज़मी
सुना करो मेरी जान, इन से उन से अफ़साने
सब अजनबी हैं यहाँ , कौन किसको पहचाने
यहाँ से जल्द गुज़र जाओ काफिलेवालो !
हैं मेरी प्यास के फूँके हुए ये वीराने ।
मेरे जूनून-ए-परस्तिश से तंग आ गए लोग
सुना है बंद किए जा रहे हैं बुतखाने
जहाँ से पिछले पहर कोई तश्न काम उट्ठा
वहीँ पे तोड़े हैं यारों ने आज पैमाने
बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने
हुआ है हुक्म कि कैफ़ी को संगसार करो
मसीह बैठे हैं छुप के कहाँ ख़ुदा जाने।
सब अजनबी हैं यहाँ , कौन किसको पहचाने
यहाँ से जल्द गुज़र जाओ काफिलेवालो !
हैं मेरी प्यास के फूँके हुए ये वीराने ।
मेरे जूनून-ए-परस्तिश से तंग आ गए लोग
सुना है बंद किए जा रहे हैं बुतखाने
जहाँ से पिछले पहर कोई तश्न काम उट्ठा
वहीँ पे तोड़े हैं यारों ने आज पैमाने
बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने
हुआ है हुक्म कि कैफ़ी को संगसार करो
मसीह बैठे हैं छुप के कहाँ ख़ुदा जाने।
कलमा या कलिमा
कलिमा का अर्थ है वाक्य,शब्द, वचन.
इसका दूसरा अर्थ है मूल मुस्लिम धर्मं मंत्र पढ़ना ( या इल्लाह इल'इल्लाह,मुहम्मद उल'रसूल अल्लाह)
यानी एक अल्लाह के सिवा दूसरा कोई ईश्वर नही है और मुहम्मद , उस अल्लाह के प्रेषित हैं ।
ک+ل+م+ۂ=کلمہ
- कलमा पढ़ना - मुस्लिम धर्म स्वीकार करना,अनुयायित्व करना।
-कलमा पढाना - मुस्लिम धर्म की दीक्षा देना।
- कलमा भरना-श्रद्धा रखना ।
-कलमा गो -कलमा पढने वाला(मुसलमान)
इसका दूसरा अर्थ है मूल मुस्लिम धर्मं मंत्र पढ़ना ( या इल्लाह इल'इल्लाह,मुहम्मद उल'रसूल अल्लाह)
यानी एक अल्लाह के सिवा दूसरा कोई ईश्वर नही है और मुहम्मद , उस अल्लाह के प्रेषित हैं ।
ک+ل+م+ۂ=کلمہ
- कलमा पढ़ना - मुस्लिम धर्म स्वीकार करना,अनुयायित्व करना।
-कलमा पढाना - मुस्लिम धर्म की दीक्षा देना।
- कलमा भरना-श्रद्धा रखना ।
-कलमा गो -कलमा पढने वाला(मुसलमान)
urdu alpabet - The palatals
The palatals jim (ج) and ch (چ) have their corresponding letters as ज and च whereas chh (چھ) and jhaa (جھ) have their reciprocals in devnaagri as छ and झ in devnaagri.Intrestingly when conjugated with other letters, the pure form would loose and the letters would appear in following form :
च = چ,چـ
छ=چھ
ज=ج
झ=جھ
The three dots below the letter denote ch or च (چـ) or pa or प (پ) , प and च should not be confused be confused amongst each other. "ch " has an angle above it where as pa is a simple line .
च = چ,چـ
छ=چھ
ज=ج
झ=جھ
The three dots below the letter denote ch or च (چـ) or pa or प (پ) , प and च should not be confused be confused amongst each other. "ch " has an angle above it where as pa is a simple line .
Monday, August 24, 2009
क्या करें- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
मेरी तेरी निगाह में
जो लाख इंतज़ार हैं
जो मेरे तेरे तन बदन में
लाख दिल फ़िगार हैं
जो मेरी तेरी उँगलियों की बेहिसी से
सब क़लम नज़ार हैं
जो मेरे तेरे शहर की
हर गली में
मेरे तेरे नक़्श-ए-पा के बेनिशाँ मज़ार हैं
जो मेरी तेरी रात के
सितारे ज़ख्म ज़ख्म हैं
जो मेरी तेरी सुबह के
गुलाब चाक चाक हैं
ये ज़ख्म सारे बे दवा
ये चाक सारे बे रफू
किसी पे राख चाँद की
किसी पे ओस का लहू
ये है भी नहीं,बता ?
ये है के महज़ जाल है
मेरे तुम्हारे इनक्बूत-ए-वहम का बुना हुआ
जो है तो इसका क्या करें
नहीं,है तो भी क्या करें
बता, बता
बता,बता
जो लाख इंतज़ार हैं
जो मेरे तेरे तन बदन में
लाख दिल फ़िगार हैं
जो मेरी तेरी उँगलियों की बेहिसी से
सब क़लम नज़ार हैं
जो मेरे तेरे शहर की
हर गली में
मेरे तेरे नक़्श-ए-पा के बेनिशाँ मज़ार हैं
जो मेरी तेरी रात के
सितारे ज़ख्म ज़ख्म हैं
जो मेरी तेरी सुबह के
गुलाब चाक चाक हैं
ये ज़ख्म सारे बे दवा
ये चाक सारे बे रफू
किसी पे राख चाँद की
किसी पे ओस का लहू
ये है भी नहीं,बता ?
ये है के महज़ जाल है
मेरे तुम्हारे इनक्बूत-ए-वहम का बुना हुआ
जो है तो इसका क्या करें
नहीं,है तो भी क्या करें
बता, बता
बता,बता
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