Saturday, January 24, 2009

हाँ,ऐ दिल-ऐ-दीवाना

हाँ,ऐ दिल-ऐ-दीवाना

वोह आज की महफ़िल में, हम को भी न पहचाना,

क्या सोच लिया दिल में, क्यों हो गया बेगाना,

हाँ, ऐ दिल-ऐ-दीवाना।

वो आप भी आते थे,हम को भी बुलाते थे,

किस चाह से मिलते थे,क्या प्यार बताते थे,

कल तक जो हक़ीक़त थी,क्यों वोह आज है अफसाना,

हाँ,ऐ दिल-ऐ-दीवाना।

बस ख़त्म हुआ किस्सा, अब ज़िक्र न हो उसका,

वो शख्स-ओ-फा-ओ-शमन,अब अपना हुआ दुश्मन,

अब उस से नहीं मिलन,

घर उस के नहीं जाना,हाँ,ऐ दिल-ऐ-दीवाना।

हाँ,कल से न जाएँगे,पर आज तो हो आएं,

उस को नहीं पा सकते,अपने ही को खो आएं,

तू बाज़ न आएगा,मुश्किल तुझ को समझाना,

वो भी तेरा कहना था,ये भी तेरा फरमाना,

चल,ऐ दिल-ऐ-दीवाना.

1 comment:

द्विजेन्द्र ‘द्विज’ said...

प्रस्तुति के लिए आभार

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित

सादर

द्विजेन्द्र द्विज
http:/www.dwijendradwij.blogspot.com/