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Wednesday, August 12, 2009

ज़ौक़

रहता सुखन से नाम क़यामत तलक है ज़ौक़,
औलाद से रहे यही दो पुश्त चार पुश्त।

Wednesday, July 22, 2009

ज़ौक़

कुछ दर्द-ए-निहाँ दिल का बयान हो नहीं सकता,
गूंगे का सा है ख्वाब,बयाँ हो नहीं सकता।

ज़ौक़

या रब इस ज़माने के लोगों को क्या हुआ,
जिसका बुरा हो उन को ये कहना - भला हुआ।

ज़ौक़

हुए इंसान सब सोज़-ए-मोहब्बत के लिए पैदा,
फ़रिश्ता होते,गर होते,इबादत के लिए पैदा.

ज़ौक़

मस्जिद में उस ने हम को,आँखें दिखा के मारा,
काफिर की देखो शोखी,घर में बुला के मारा.

ज़ौक़


बरसों हो हिज्र,वस्ल हो इक दम नसीब,कम होगा मुझ सा कोई मुहब्बत में कम नसीब

गर मेरी खाक़ को हो तुम्हारे कदम नसीब,खाया करे नसीब की मेरे,कसम ,नसीब।

माही हो या वोह माह, वो इक हो या हज़ार,बेदाग़हो न दस्ते फलक से ड्रम नसीब।

बेहतर हैं लाख लुत्फ़-ओ-करम से ,तेरे सितम,अपने ज़हेनसीब,के हों ये सितम, नसीब।

इमाँ है तेरा शौक़-ए-बक़ा,जिस को ये न हो ,दीदार उसे ख़ुदा का न हो ऐ सनम,नसीब।

जाते हैं कू-ए-यार को इस में जो हो सो हो,ऐ ज़ौक़ आज़माते हैं आज अपने हम,नसीब।

Monday, July 20, 2009

ज़ौक़

दुनिया के अलम जौक उठा जायेंगे,
हम क्या कहें क्या आए थे, क्या जायेंगे,
जब आए थे तो रोते हुए आप आए थे,
अब जाएँगे औरों को रुला जाएँगे।

ज़ौक़

आदमी हो गर मुकद्दर क्या कसूर इदराक का,
खाक़ का पुतला है ये,कुछ तो असर हो खाक़ का।

मुकद्दर का मतलब है गन्दा ,घिनौना , जो साफ़ न रहता हो । ये शब्द मुक़द्दर से अलग है जिसका मतलब होता है भाग्य।

इदराक-ज्ञान,प्रतिभा,समझ.

ज़ौक़

जो कहोगे तुम, तो कहेंगे हम,हाँ यूँ ही सही,
आप की यूँही खुशी है,मेहरबान यूँ ही सही।
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हम हैं गुलाम उन के जो हैं वफ़ा के बन्दे,
इस को यकीन मानो गर हो खुदा के बन्दे।
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