Wednesday, September 9, 2009

Urdu Alphabet- The three elementary wovels 1

एक दोस्त डॉ रुपेश श्रीवास्तव साहब की टिपण्णी थी, हूर शब्द के लिखने पर, हूर लिखा जाता है , कुछ इस तरह :


ح+و+ر=حور

अब यह शब्द, urdu में हूर,हुर ,होर या हवर किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , कहने का अर्थ यह है के यहाँ आकर urdu व्याकरण एक सीमा में बाँध जाता है , क्योंकि इस शब्द को इन चारों में से किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , शुद्ध रूप में लिखने पर कुछ लोग इस
शब्द के ऊपर एक ज़माह या (و) भी लगा देंगे जिससे कम से कम इतना clear हो जाएगा की यह उ है,लेकिन यह फिर भी नहीं जान पाएँगे के ये र्हस्व है या दीर्घ .

दरअसल उर्दू में संकृत की तरह ही तीन मुख्य (Elementary ) स्वर या वोवेल्स होते हैं:

अलिफ़ (ا)
वाव(و)
"ये" या " या-ऐ-मअरूफ़ (ی)

अलिफ़ -उल-मद्द (آ)बना है अलिफ़ के ऊपर मद्द (ـ) लगा देने पर और इसका उपयोग होता है ,देवनागरी उच्चारण "आ" के लिए।

उदाहरण के लिए , एक शब्द है आरज़ू जिसका अर्थ है इच्छा,अभिलाषा।

آرزو

ऐन (ع)एक व्यंजन है जिसे ' के साथ लगा कर उसे वोवेल (अ,इ,उ) के रूप में उपयोग में लाया जाता है ।

ऐन किसी दूसरे अक्षर के साथ जुड़ कर दूसरे फॉर्म में बदल जाता है और उसे पढ़ा जाता है (عـ)

मिसाल के तौर पर , ये शब्द देखिये,

अशर - اشر

अशर का अर्थ है ,दुष्ट,पाजी।

अशर- عشر

अशर का अर्थ है दस,दसवां भाग,मुग़ल काल में बादशाह इस इकाई के इस्तेमाल से ज़मीन का कर वसूलते थे।

और हाँ , अब ऐन (ع،عـ)को सीख लिया है तो (غ،غـ) गैन - से भी वाकिफ हो लीजिये ,
गैन को लिखते हैं "ग़" लिखने के लिए।

गालिब को लिखते हैं

غالب

लेकिन यह सब ज्ञान तभी काम में आएगा,जब आप urdu पढेंगे और धीरे धीरे अपना व्याकरण सुधर लेंगे,क्योंकि व्याकरण कुछ ख़ास interesting नहीं है,या कह लीजिये के बहुत बोअरिंग हो जाता है ।

इसी लिए urdu पढ़ना बहुत ज़रूरी है , तो चलिए एक शेर पढ़ें,



آۓ کچھ ابر کچھ شراب آۓ
اس کے بعد آۓ جو عزاب آۓ







Tuesday, September 8, 2009

urdu alphabet- प वर्ग और च वर्ग

ज और ब के बीच भी confusion होना स्वाभाविक है क्योंकि दोनों के नीचे एक बिन्दु लगता है,लेकिन धीरे धीरे प्रयास और पढने से आप दोनों में अन्तर करना सीख जायेंगे। च वर्ग के सारे अक्षर ऊपर की और से मुडेहुए होते हैं , अब देखिये:

प=پ پـ
च=چ چـ

फ=پھ
छ=چـھ

ब=
ب بـ
ज=ج جـ
अब देखिये इनमें अन्तर कैसे देखेंगे , एक शब्द है " जला" जिसका अर्थ है निकल देना , तडीपार या देश से निकल देना, और दूसरा शब्द है बला -जिसका अर्थ है विपत्ति,संकट।

बला -بلا
जला -جلا

भ=بھ
झ =جھ

म=م
न=ن

विसाल

visaal :
विसाल का अर्थ है मिलन,संयोग,ये कभी कभी मृत्यु के लिए भी उपयोग किया जाता है ।

و+ص+ا+ل=وصال

नौ'अ

NOU
नौ'अ का अर्थ है जाती, वर्ग,प्रकार, रंग ढंग ।

ن+و+ع=نوع

अनवा'अ

ANWAN
अन्वां का अर्थ है अनेक प्रकार,रंग ढंग , यह नौ'अ का बहु वचन है जिसका अर्थ होता है -प्रकार , जाती,वर्ग,रंग ढंग।

ا+ن+و+ا+ع=منواع

क़ाफ़िला या क़ाफ़िला:

QAFILA(KAFILA)

क़ाफ़िला या क़फ़िल : का अर्थ है जमाव,लोगों का झुंड ।

ق+ا+ف+ي+ل+ہ=قافيلہ

इक बात आप ने नोटिस की होगी के यहाँ शब्द क़फ़िल: है और इसी लिए लाम या ल (ل) के बाद ह (ہ) का उपयोग किया गया है।

सेहरा या सहरा

सेहरा या सहरा (SEHRA ) :

वन,जंगल,रेगिस्तान ।

‎ص+ح+ر+ا=صحرا

कुर्बत

कुर्बत (KURBAT)का अर्थ है दुःख,क्लेश,यातना।

ک+ر+ب+ت=کربت

यहिएँ अगर क (ک) की जगह अगर क़ (ق) उपयोग किया गया तो अर्थ एकदम भिन्न हो जाता है।

कुर्बत

कुर्बत (QURBAT)का अर्थ है सामीप्य, सहवास, नज़दीकी ।

ق+ر+ب+ت=قربت

इसमें क़(ق) का इस्तेमाल किया गया है, यहीं अगर क (ک) का इस्तेमाल हो तो अर्थ अलग हो जाता है।

माज़ी

माज़ी (MAAZI),past को कहते हैं, जो बीत गया वो माज़ी

م+ا+ض+ي=ماضي

कभी कभी याद में उभरते हैं- फ़ैज़

कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी
मिटे मिटे से
वो आज़माइश दिल-ओ-नज़र की, वो कुर्बतें सी, वो फासले से

कभी कभी आरजू के सेहरा में,आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से

वो सारी बातें लगाव की सी, वो सारे अन्वां विसाल के से

निगाह-ओ-दिल को क़रार कैसा , निशात-ओ-ग़म में कमी कहाँ की

वो जब मिले हैं तो उन से, हर बार की है उल्फ़त नए सिरे से

बहुत गिरां है ये ऐश-ए-तन्हाई , कहीं सबक तर , कहीं गवारा

वो दर्द-ए-पिन्हाँ के सारी दुनिया रफ़ीक़ थी वास्ते से

तुम्ही कहो रिंद-ओ-महतसब में है आज सब को न फ़र्क़ ऐसा

ये आ के बैठे हैं मैकदे में , वो उठ के आए हैं मैकदे से .

Monday, September 7, 2009

हंगाम

हंगाम (HANGAAM,HANGAM)का अर्थ है समय, काल।

ھ+ن+گ+ا+م=ھنگام

अय्याम

अय्याम (AYYAM)का अर्थ है अनेक दिन , यह यूम का बहु वचन है।

ا+يـ+ّ+ا+م=ايـّام

मुद्दई

मुद्दई का अर्थ है दुश्मन,शत्रु।

م+د+ّ+‏ع+ي=مدّعي

उल्फत

उल्फत याने प्यार,प्रेम।

ا+ل+ف+ت=الفت

इकराम

इकराम का अर्थ है इनाम,सम्मान,प्रतिष्ठा ।

ا+ک+ر+ا+م=اکرام

याद रखिये, urdu में अ,इ,उ, ऐ के लिए (ا) का ही इस्तेमाल होता है.कभी कभी इ को स्पष्ट करने के लिए
(ا) के नीचे हलन्तलगा दिया जाता है और उ के लिए (ا) के ऊपर (و) लगा दिया जाता है।

दुष्नाम

दुश्नाम का अर्थ है गाली , अपशब्द।

د+ش+ن+ا+م=دشنام

दुश्नाम-तराजी: गाली देना।-دشنامطرازي
दुश्नाम-तराशी: गाली बनाना।-دشنامتراشي
दुश्नाम दिही: गालीदेना। -دشنامدھي

Urdu Alphabet- The difference between च and प

च और प के बीच भी आप confuse होंगे क्योंकि दोनों ही अक्षरों के नीचे तीन बिन्दु होते हैं:

च = چ چـ
प=پ پـ


तीन बिन्दुओं की बात निकली है तो श भी मत भूलियेगा , लेकिंग श को लिखते हैं स की तरह और तीन बिन्दु होते हैं , नीचे के बजाय , अक्षर के ऊपर ।

=ش

अब आप लिखते हैं ,

चपल= چپل
चप्पल=چپّل
पचवाक (इसका अर्थ होता है अनुवाद) : پچواک

एक और बात चप्पल शब्द में प के ऊपर आपने (ّ) देखा,दरसल urdu में अक्षर को दोबारा लिखने के बजाय उसके ऊपर यह(ّ) orthographical mark लगा दिया जाता है,इसे कहा जाता है तशदीद ।
किसी भी अक्षर के ऊपर तशदीद लगा देने पर उस अक्षर का उच्चारण दो बार हो जाता है।

लि'आन (Annonimus के लिए)

जब मैंने "ज़ियाँ" का अर्थ बताया , तो एक सज्जन ने annonimus पोस्ट लिखा और पूछा के "लिया" का क्या अर्थ है?
उर्दू में, "लिया " तो कोई शब्द नहीं है , हाँ मगर लि'आन है , जिसका अर्थ है
१एक दूसरे का धिक्कार करना
२ पति द्वारा पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाकर तलाक़ ले लेना।

ل+ع+ا+ن=لعان

फ़ैज़

फ़ैज़ याने यश,उपकार,दानशीलता।

ف+ي+ض=فيض

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया-फ़ैज़

वो लोग बहोत खुश किस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिकी करते थे
हम जीते जी मसरूफ रहे
कुछ इश्क़ किया
कुछ काम किया
काम , इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ काम से उलझता रहा
फिर आख़िर तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया।

Thursday, September 3, 2009

ज़ियाँ

ज़ियाँ का अर्थ है नुकसान, हानि,अनिष्ट,अशुभ

ز+ي+ا+ں=زياں

नवा

नवा का अर्थ है सुर

ن+و+ا=نوا

जवाज़

जवाज़ का अर्थ है परमिट या औचित्य

ج+و+ا+ز=جواز

फ़क़ीह

फ़क़ीह का अर्थ है धर्मशास्त्र्ग्यमुस्लिम धर्म का पारंगत ।

ف+ق+ي+ہ=فقيہ

फ़ैज़ ने कहा है :
फ़क़ीह-ऐ-शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें,
के चांदनी को भी हज़रतहराम कहते हैं "

फ़ाम

फ़ाम याने रंग का , लाल फ़ाम याने लाल रंग का,सियह्फ़ामयाने काले रंग का,
गुलफ़ामयाने फूल के रंग का :

ف+ا+م=فام

गिरां

गिरां का अर्थ है वज़नदार,भारी या महंगा , कीमती।

گ+ر+ا+ں=گراں

"वहीं है " दिल कराइन तमाम कहते हैं-फ़ैज़

वहीं है दिल, कराइन तमाम कहते हैं
वो एक ख़लिश के जिसे तेरा नाम कहते हैं

तुम आ रही हो के बजती हैं मेरी जंजीरें
न जाने क्या मेरे दीवार-ओ-बाम कहते हैं

यही किनार-ए-फ़लक का सियाह्तरीन गोशा
यही है मतला-ए-माह-ए-तमाम , कहते हैं

पियो के मुफ्त लगा दी गई है खून-ए-दिल की कसीर
गिरां है के अब के मय लाल फ़ाम कहते हैं

फ़कीह शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें
के चांदनी को भी हज़रत हराम कहते हैं

नवा-ए-मुर्ग़ को कहते हैं अब ज़ियाँ-ए-चमन
खिले न फूल उसे इंतिज़ाम कहते हैं

कहो तो हम भी चलें फ़ैज़ अब नहीं सर-ए-दार
फर्क-ए-मर्तबा ख़ास-ओ-आम कहते हैं

मतल'अ या मतला या मितला

मतल'अ कहते हैं ग़ज़ल के पहले शेर को, इसके दोनों भाग एक जैसे होते हैं। इसे कभी क्षितिज या उद्गम ( शुरू होने की जगह) के बतौर भी लिखा जाता है।

م+ط+ل+ع=مطلع

मतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है।

फ़ैज़ कहते हैं -
" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,
यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "

गोशः या गोशा

गोशः या गोशा का अर्थ है कोना, एकांत की जगह ।

گ+و+ش+ہ=گوشہ

तरीन या तरीं

तरीं का अर्थ है सबसे ज़्यादा , यह एक डिग्री है जो शब्द के अंत में जोड़ दी जाती है , जैसे बद तरीं याने सबसे बुरा या सियाह्तरीनयाने सबसे अशुभ।

ت+ر+ي+ں=تريں

सियह

सियह , ये सियाह का एकवचन है या संक्षिप्त रूप है , इसका अर्थ है काला या अशुभ ।

س+يـ+ہ=سيـہ

किनार या कनार

किनार या कनार का अर्थ है किनारा,तट , इसे बगल या गोद के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

ک+ن+ا+ر=کنار