सुबह फूटी तो आसमां पर तेरे ,
रंग-ए-रुखसार की फुहार गिरी,
रात छाई तो रु-ए-अलम पर,
तेरी ज़ुल्फ़ों की आबशार गिरी।
Urdu- The language,Script,Poetry and Learning
This is for all those who love urdu,would like to Read and write Urdu. Besides the poems that i love, I'm also trying to create an urdu dictionary or it may just remain a collection of my favourite urdu words.
Saturday, September 11, 2010
Wednesday, May 5, 2010
Urdu Numerics

The numbers are read from left to right , like one reads in all other languages, unlike the urdu text which is read right to left.
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Numerics
Wednesday, September 9, 2009
Urdu Alphabet- The three elementary wovels 1
एक दोस्त डॉ रुपेश श्रीवास्तव साहब की टिपण्णी थी, हूर शब्द के लिखने पर, हूर लिखा जाता है , कुछ इस तरह :
ح+و+ر=حور
अब यह शब्द, urdu में हूर,हुर ,होर या हवर किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , कहने का अर्थ यह है के यहाँ आकर urdu व्याकरण एक सीमा में बाँध जाता है , क्योंकि इस शब्द को इन चारों में से किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , शुद्ध रूप में लिखने पर कुछ लोग इस
शब्द के ऊपर एक ज़माह या (و) भी लगा देंगे जिससे कम से कम इतना clear हो जाएगा की यह उ है,लेकिन यह फिर भी नहीं जान पाएँगे के ये र्हस्व है या दीर्घ .
दरअसल उर्दू में संकृत की तरह ही तीन मुख्य (Elementary ) स्वर या वोवेल्स होते हैं:
अलिफ़ (ا)
वाव(و)
"ये" या " या-ऐ-मअरूफ़ (ی)
अलिफ़ -उल-मद्द (آ)बना है अलिफ़ के ऊपर मद्द (ـ) लगा देने पर और इसका उपयोग होता है ,देवनागरी उच्चारण "आ" के लिए।
उदाहरण के लिए , एक शब्द है आरज़ू जिसका अर्थ है इच्छा,अभिलाषा।
آرزو
ऐन (ع)एक व्यंजन है जिसे ' के साथ लगा कर उसे वोवेल (अ,इ,उ) के रूप में उपयोग में लाया जाता है ।
ऐन किसी दूसरे अक्षर के साथ जुड़ कर दूसरे फॉर्म में बदल जाता है और उसे पढ़ा जाता है (عـ)
मिसाल के तौर पर , ये शब्द देखिये,
अशर - اشر
अशर का अर्थ है ,दुष्ट,पाजी।
अशर- عشر
अशर का अर्थ है दस,दसवां भाग,मुग़ल काल में बादशाह इस इकाई के इस्तेमाल से ज़मीन का कर वसूलते थे।
और हाँ , अब ऐन (ع،عـ)को सीख लिया है तो (غ،غـ) गैन - से भी वाकिफ हो लीजिये ,
गैन को लिखते हैं "ग़" लिखने के लिए।
गालिब को लिखते हैं
غالب
लेकिन यह सब ज्ञान तभी काम में आएगा,जब आप urdu पढेंगे और धीरे धीरे अपना व्याकरण सुधर लेंगे,क्योंकि व्याकरण कुछ ख़ास interesting नहीं है,या कह लीजिये के बहुत बोअरिंग हो जाता है ।
इसी लिए urdu पढ़ना बहुत ज़रूरी है , तो चलिए एक शेर पढ़ें,
آۓ کچھ ابر کچھ شراب آۓ
اس کے بعد آۓ جو عزاب آۓ
ح+و+ر=حور
अब यह शब्द, urdu में हूर,हुर ,होर या हवर किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , कहने का अर्थ यह है के यहाँ आकर urdu व्याकरण एक सीमा में बाँध जाता है , क्योंकि इस शब्द को इन चारों में से किसी भी रूप में पढ़ा जा सकता है , शुद्ध रूप में लिखने पर कुछ लोग इस
शब्द के ऊपर एक ज़माह या (و) भी लगा देंगे जिससे कम से कम इतना clear हो जाएगा की यह उ है,लेकिन यह फिर भी नहीं जान पाएँगे के ये र्हस्व है या दीर्घ .
दरअसल उर्दू में संकृत की तरह ही तीन मुख्य (Elementary ) स्वर या वोवेल्स होते हैं:
अलिफ़ (ا)
वाव(و)
"ये" या " या-ऐ-मअरूफ़ (ی)
अलिफ़ -उल-मद्द (آ)बना है अलिफ़ के ऊपर मद्द (ـ) लगा देने पर और इसका उपयोग होता है ,देवनागरी उच्चारण "आ" के लिए।
उदाहरण के लिए , एक शब्द है आरज़ू जिसका अर्थ है इच्छा,अभिलाषा।
آرزو
ऐन (ع)एक व्यंजन है जिसे ' के साथ लगा कर उसे वोवेल (अ,इ,उ) के रूप में उपयोग में लाया जाता है ।
ऐन किसी दूसरे अक्षर के साथ जुड़ कर दूसरे फॉर्म में बदल जाता है और उसे पढ़ा जाता है (عـ)
मिसाल के तौर पर , ये शब्द देखिये,
अशर - اشر
अशर का अर्थ है ,दुष्ट,पाजी।
अशर- عشر
अशर का अर्थ है दस,दसवां भाग,मुग़ल काल में बादशाह इस इकाई के इस्तेमाल से ज़मीन का कर वसूलते थे।
और हाँ , अब ऐन (ع،عـ)को सीख लिया है तो (غ،غـ) गैन - से भी वाकिफ हो लीजिये ,
गैन को लिखते हैं "ग़" लिखने के लिए।
गालिब को लिखते हैं
غالب
लेकिन यह सब ज्ञान तभी काम में आएगा,जब आप urdu पढेंगे और धीरे धीरे अपना व्याकरण सुधर लेंगे,क्योंकि व्याकरण कुछ ख़ास interesting नहीं है,या कह लीजिये के बहुत बोअरिंग हो जाता है ।
इसी लिए urdu पढ़ना बहुत ज़रूरी है , तो चलिए एक शेर पढ़ें,
آۓ کچھ ابر کچھ شراب آۓ
اس کے بعد آۓ جو عزاب آۓ
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urdu alphabet
Tuesday, September 8, 2009
urdu alphabet- प वर्ग और च वर्ग
ज और ब के बीच भी confusion होना स्वाभाविक है क्योंकि दोनों के नीचे एक बिन्दु लगता है,लेकिन धीरे धीरे प्रयास और पढने से आप दोनों में अन्तर करना सीख जायेंगे। च वर्ग के सारे अक्षर ऊपर की और से मुडेहुए होते हैं , अब देखिये:
प=پ پـ
च=چ چـ
फ=پھ
छ=چـھ
ब=ب بـ
ज=ج جـ
अब देखिये इनमें अन्तर कैसे देखेंगे , एक शब्द है " जला" जिसका अर्थ है निकल देना , तडीपार या देश से निकल देना, और दूसरा शब्द है बला -जिसका अर्थ है विपत्ति,संकट।
बला -بلا
जला -جلا
भ=بھ
झ =جھ
म=م
न=ن
प=پ پـ
च=چ چـ
फ=پھ
छ=چـھ
ब=ب بـ
ज=ج جـ
अब देखिये इनमें अन्तर कैसे देखेंगे , एक शब्द है " जला" जिसका अर्थ है निकल देना , तडीपार या देश से निकल देना, और दूसरा शब्द है बला -जिसका अर्थ है विपत्ति,संकट।
बला -بلا
जला -جلا
भ=بھ
झ =جھ
म=م
न=ن
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urdu alphabet
क़ाफ़िला या क़ाफ़िला:
QAFILA(KAFILA)
क़ाफ़िला या क़फ़िल : का अर्थ है जमाव,लोगों का झुंड ।
ق+ا+ف+ي+ل+ہ=قافيلہ
इक बात आप ने नोटिस की होगी के यहाँ शब्द क़फ़िल: है और इसी लिए लाम या ल (ل) के बाद ह (ہ) का उपयोग किया गया है।
क़ाफ़िला या क़फ़िल : का अर्थ है जमाव,लोगों का झुंड ।
ق+ا+ف+ي+ل+ہ=قافيلہ
इक बात आप ने नोटिस की होगी के यहाँ शब्द क़फ़िल: है और इसी लिए लाम या ल (ل) के बाद ह (ہ) का उपयोग किया गया है।
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क
कभी कभी याद में उभरते हैं- फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी
मिटे मिटे से
वो आज़माइश दिल-ओ-नज़र की, वो कुर्बतें सी, वो फासले से
कभी कभी आरजू के सेहरा में,आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से
वो सारी बातें लगाव की सी, वो सारे अन्वां विसाल के से
निगाह-ओ-दिल को क़रार कैसा , निशात-ओ-ग़म में कमी कहाँ की
वो जब मिले हैं तो उन से, हर बार की है उल्फ़त नए सिरे से
बहुत गिरां है ये ऐश-ए-तन्हाई , कहीं सबक तर , कहीं गवारा
वो दर्द-ए-पिन्हाँ के सारी दुनिया रफ़ीक़ थी वास्ते से
तुम्ही कहो रिंद-ओ-महतसब में है आज सब को न फ़र्क़ ऐसा
ये आ के बैठे हैं मैकदे में , वो उठ के आए हैं मैकदे से .
मिटे मिटे से
वो आज़माइश दिल-ओ-नज़र की, वो कुर्बतें सी, वो फासले से
कभी कभी आरजू के सेहरा में,आ के रुकते हैं क़ाफ़िले से
वो सारी बातें लगाव की सी, वो सारे अन्वां विसाल के से
निगाह-ओ-दिल को क़रार कैसा , निशात-ओ-ग़म में कमी कहाँ की
वो जब मिले हैं तो उन से, हर बार की है उल्फ़त नए सिरे से
बहुत गिरां है ये ऐश-ए-तन्हाई , कहीं सबक तर , कहीं गवारा
वो दर्द-ए-पिन्हाँ के सारी दुनिया रफ़ीक़ थी वास्ते से
तुम्ही कहो रिंद-ओ-महतसब में है आज सब को न फ़र्क़ ऐसा
ये आ के बैठे हैं मैकदे में , वो उठ के आए हैं मैकदे से .
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फ़ैज़
Monday, September 7, 2009
Urdu Alphabet- The difference between च and प
च और प के बीच भी आप confuse होंगे क्योंकि दोनों ही अक्षरों के नीचे तीन बिन्दु होते हैं:
च = چ چـ
प=پ پـ
तीन बिन्दुओं की बात निकली है तो श भी मत भूलियेगा , लेकिंग श को लिखते हैं स की तरह और तीन बिन्दु होते हैं , नीचे के बजाय , अक्षर के ऊपर ।
श=ش
अब आप लिखते हैं ,
चपल= چپل
चप्पल=چپّل
पचवाक (इसका अर्थ होता है अनुवाद) : پچواک
एक और बात चप्पल शब्द में प के ऊपर आपने (ّ) देखा,दरसल urdu में अक्षर को दोबारा लिखने के बजाय उसके ऊपर यह(ّ) orthographical mark लगा दिया जाता है,इसे कहा जाता है तशदीद ।
किसी भी अक्षर के ऊपर तशदीद लगा देने पर उस अक्षर का उच्चारण दो बार हो जाता है।
च = چ چـ
प=پ پـ
तीन बिन्दुओं की बात निकली है तो श भी मत भूलियेगा , लेकिंग श को लिखते हैं स की तरह और तीन बिन्दु होते हैं , नीचे के बजाय , अक्षर के ऊपर ।
श=ش
अब आप लिखते हैं ,
चपल= چپل
चप्पल=چپّل
पचवाक (इसका अर्थ होता है अनुवाद) : پچواک
एक और बात चप्पल शब्द में प के ऊपर आपने (ّ) देखा,दरसल urdu में अक्षर को दोबारा लिखने के बजाय उसके ऊपर यह(ّ) orthographical mark लगा दिया जाता है,इसे कहा जाता है तशदीद ।
किसी भी अक्षर के ऊपर तशदीद लगा देने पर उस अक्षर का उच्चारण दो बार हो जाता है।
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orthographical marks,
urdu alphabet,
तशदीद
लि'आन (Annonimus के लिए)
जब मैंने "ज़ियाँ" का अर्थ बताया , तो एक सज्जन ने annonimus पोस्ट लिखा और पूछा के "लिया" का क्या अर्थ है?
उर्दू में, "लिया " तो कोई शब्द नहीं है , हाँ मगर लि'आन है , जिसका अर्थ है
१एक दूसरे का धिक्कार करना
२ पति द्वारा पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाकर तलाक़ ले लेना।
ل+ع+ا+ن=لعان
उर्दू में, "लिया " तो कोई शब्द नहीं है , हाँ मगर लि'आन है , जिसका अर्थ है
१एक दूसरे का धिक्कार करना
२ पति द्वारा पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाकर तलाक़ ले लेना।
ل+ع+ا+ن=لعان
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ल
Thursday, September 3, 2009
"वहीं है " दिल कराइन तमाम कहते हैं-फ़ैज़
वहीं है दिल, कराइन तमाम कहते हैं
वो एक ख़लिश के जिसे तेरा नाम कहते हैं
तुम आ रही हो के बजती हैं मेरी जंजीरें
न जाने क्या मेरे दीवार-ओ-बाम कहते हैं
यही किनार-ए-फ़लक का सियाह्तरीन गोशा
यही है मतला-ए-माह-ए-तमाम , कहते हैं
पियो के मुफ्त लगा दी गई है खून-ए-दिल की कसीर
गिरां है के अब के मय लाल फ़ाम कहते हैं
फ़कीह शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें
के चांदनी को भी हज़रत हराम कहते हैं
नवा-ए-मुर्ग़ को कहते हैं अब ज़ियाँ-ए-चमन
खिले न फूल उसे इंतिज़ाम कहते हैं
कहो तो हम भी चलें फ़ैज़ अब नहीं सर-ए-दार
फर्क-ए-मर्तबा ख़ास-ओ-आम कहते हैं
वो एक ख़लिश के जिसे तेरा नाम कहते हैं
तुम आ रही हो के बजती हैं मेरी जंजीरें
न जाने क्या मेरे दीवार-ओ-बाम कहते हैं
यही किनार-ए-फ़लक का सियाह्तरीन गोशा
यही है मतला-ए-माह-ए-तमाम , कहते हैं
पियो के मुफ्त लगा दी गई है खून-ए-दिल की कसीर
गिरां है के अब के मय लाल फ़ाम कहते हैं
फ़कीह शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें
के चांदनी को भी हज़रत हराम कहते हैं
नवा-ए-मुर्ग़ को कहते हैं अब ज़ियाँ-ए-चमन
खिले न फूल उसे इंतिज़ाम कहते हैं
कहो तो हम भी चलें फ़ैज़ अब नहीं सर-ए-दार
फर्क-ए-मर्तबा ख़ास-ओ-आम कहते हैं
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फ़ैज़
मतल'अ या मतला या मितला
मतल'अ कहते हैं ग़ज़ल के पहले शेर को, इसके दोनों भाग एक जैसे होते हैं। इसे कभी क्षितिज या उद्गम ( शुरू होने की जगह) के बतौर भी लिखा जाता है।
م+ط+ل+ع=مطلع
मतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है।
फ़ैज़ कहते हैं -
" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,
यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "
م+ط+ل+ع=مطلع
मतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है।
फ़ैज़ कहते हैं -
" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,
यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "
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तरीन या तरीं
तरीं का अर्थ है सबसे ज़्यादा , यह एक डिग्री है जो शब्द के अंत में जोड़ दी जाती है , जैसे बद तरीं याने सबसे बुरा या सियाह्तरीनयाने सबसे अशुभ।
ت+ر+ي+ں=تريں
ت+ر+ي+ں=تريں
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